व्हाइट हाउस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से मुलाकात के बाद कहा कि पेरिस में ऐतिहासिक जलवायु परिवर्तन समझौता संभव नहीं होता अगर भारत कुछ महत्वपूर्ण प्रतिबद्धताएं व्यक्त करने में नेतृत्व ना करता। प्रेस सचिव जोश अर्नेस्ट ने कहा कि हमने कई बार कहा है कि इस प्रक्रिया में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण थी और अगर भारतीय तेज कदम नहीं उठाते और कुछ महत्वपूर्ण प्रतिबद्धताओं में नेतृत्व नहीं दर्शाते तो पिछले साल दिसंबर में पेरिस में हुए समझौते पर हम शायद वास्तव में पहुंच नहीं पाते।

बातचीत में दोनों नेताओं ने इस साल के अंत तक पेरिस समझौते में शामिल होने की प्रतिबद्धता को पूरा करने की बात दोहराई। अर्नेस्ट ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और कार्बन प्रदूषण से लड़ने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय समझौते पर पहुंचने में भारत ने जो अग्रणी भूमिका निभाई है, उसके बारे में व्यापक बातचीत हुई। अर्नेस्ट ने कहा कि पिछले साल पेरिस में मोदी की भूमिका, वह जो न केवल अपने देश के लिए बल्कि पूरी धरती के लिए सही सोचते हैं, उसे करने का राजनीतिक जोखिम लेने की दृढ़ता का प्रमाण है।

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