विवादों में रहने वाले शारदा पीठ के जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा है कि मोदी सरकार अयोध्या में राम मंदिर कभी नहीं बनाएगी। जगतगुरु शंकराचार्य ने संवाददाताओं से बातचीत के दौरान कहा कि पिछले करीब दो वर्षो के कार्यकाल में मोदी सरकार ने ऐसा कुछ नहीं किया, जिससे लगे कि रामलला का मंदिर बनने जा रहा है।

उन्होंने कहा कि मंदिर को लेकर स्वार्थपूर्ण राजनीति चल रही है। मौजूदा केंद्र सरकार राम मंदिर के नाम का सहारा लेकर सत्ता में आ गई, लेकिन कुर्सी पर बैठते ही राम को भूल गई। हकीकत यह है कि भाजपा कभी राम मंदिर नहीं बनाएगी। राम केवल एक पार्टी के नहीं हैं। पूरे विश्व का उन पर अधिकार है। मंदिर का निर्माण विद्वान और संत मिलकर करेंगे।

उत्तराखंड के सियासी संकट के लिए उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने एक साजिश के तहत हरीश रावत की सरकार को गिराया है।

हालाँकि यह जानने का विषय है स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती हमेशा से ही कांग्रेस का पक्ष लेते आय है, उन्होंने प्रधानमन्त्री मोदी पर शुरू से है विवादस्पद बयान दिए है जैसे कि हर हर मोदी पर दिया बयान…, महाराष्ट्र चुनाव के समय साईं विवाद को हवा देना भी उन पर संदेह पड़ा करता है, बड़ा प्रश्न यह है कि स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने आज तक कभी कांग्रेस पर मंदिर के लिए दबाब नहीं डाला जबकि उनके दरबार में सोनिया गांधी भी शीश झुकाती है, दिग्विजय सिंह उनके शिषय है तो क्यों वो आज मंदिर पर विवाद उत्पन करना चाहते है? क्या स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती मोदी पर ऊँगली उठा कर हिन्दू वोटो को बीजेपी के खिलाफ करना चाहते है? यह तो साफ़ है कि वो खुद भी मंदिर निर्माण के लिए संजीदा नहीं है, होते तो उनका यह रुप्प कांग्रेस के शासन काल में क्यों नहीं दिखा?

loading...