हमारा संसद भवन ब्रिटिश वास्तुविद् सर एडविन ल्युटेन की मौलिक परिकल्पना माना जाता है लेकिन इसका मॉडल चौंसठ योगिनी शिव मंदिर से मेल खाता है. इसे ‘इकंतेश्वर महादेव मंदिर’ के नाम से भी जाना जाता है.

Chausath-Yogini-Temple

यह चौंसठ योगिनी शिवमंदिर अपनी वास्तुकला और गौरवशाली परंपरा के लिए आसपास के इलाके में प्रसिद्ध है. स्थानीय लोग इसे ‘चम्बल की संसद’ के नाम से भी जानते हैं. इस मंदिर की ऊंचाई भूमि तल से 300 फीट है. इसका निर्माण तत्कालीन प्रतिहार क्षत्रिय राजाओं ने किया था. यह मंदिर गोलाकार है. इसी गोलाई में बने चौंसठ कमरों में एक-एक शिवलिंग स्थापित है. इसके मुख्य परिसर में एक विशाल शिव मंदिर है.

भारतीय पुरातत्व विभाग के मुताबिक़, इस मंदिर को ९वीं सदी में बनवाया गया था. कभी हर कमरे में भगवान शिव के साथ देवी योगिनी की मूर्तियां भी थीं, इसलिए इसे चौंसठ योगिनी शिवमंदिर भी कहा जाता है. देवी की कुछ मूर्तियां चोरी हो चुकी हैं और कुछ मूर्तियां देश के विभिन्न संग्रहालयों में भेजी गई हैं. यह मंदिर कई तरह से अद्वितीय है. आम दिनों में सनातन धर्म और तांत्रिक क्रियाओं पर विश्वास करने वाले विदेशी नागरिक भी यहां पूजा करते दिख जाते हैं. इस मंदिर को एक समय तांत्रिक विश्वविद्यालय कहा जाता था.

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