स्मृति ईरानी द्वारा संसद में जेएनयू के वामपंथी छात्रों द्वारा माँ दुर्गा के अपमान का मुद्दा उठाए जाने के बाद से अनेक वामपंथी आजकल इस बात का मीडिया में प्रचार करने में जुटे हुए हैं कि महिषासुर की पूजा भारत में सदियों से प्रचलित हैं। किंतु यह सरासर गप्प हिंदूओं को आर्य और द्रविड़ में बाँटकर आपस में लड़ाने के लिए ईसाई मिशनरियों और वामपंथियों ने मिलकर रची है।

सच्चाई यह है कि अनेक विद्वानों ने असुर जनजाति के बारे में अनेक दशक पहले जो अनुसंधान किए थे, उनमें असुर जनजाति के आदिवासियों द्वारा महिषासुर पूजा का कोई भी उल्लेख प्राप्त नहीं होता।

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