होली, यानी उमंग और अध्यात्म के मेल का त्योहार

होली का खुमार लोगो पर सर चढ़ कर बोल रहा है जहा बरसाना और नंदगांव में लठ्ठमार होली की धूम मची है वही वृंदावन में बांकेबिहारी जी में गुलाल होली और फूलों से होली की धूम मची है. हर कोई सरोबार है अपने ठाकुर के साथ होली खेलने में.

वृंदावन और फागुन का रिश्ता काफी पुराना है और होली का नाम लेते ही मथुरा, वृंदावन की गलियां बरबस ही याद आ जाती हैं. वृंदावन की गलियों में होली का मतलब होता है, कृष्ण और राधा की अठखेलियां, जहां कृष्ण राधा को होली खेलने के लिए मना रहे हैं और मयूर नृत्य से उन्हें रिझाने की कोशिश कर रहें हैं. लेकिन जैसे ही कृष्ण होली खेलने राधा के पास जाते हैं, तभी शुरू होती है लट्ठमार होली, जिससे वृंदावन की होली का आगाज होता है.

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